क्वारंटाइन बिरयानी (एक अनाड़ी पकाने वाली की तरकीबें) (Hindi)

 

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Title:

क्वारंटाइन बिरयानी (एक अनाड़ी पकाने वाली की तरकीबें)

Summary:

Date published: 25th of May 2020

Genre: Humour / Recipes

Pages: 29

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क्वारंटाइन  बिरयानी

 

 

मैं पूना में अपनी बहन के साथ रहता हूँ। मास्टर्ज़ के यए यहां आया हूँ। और जब से आया हूँ, किसी ना किसी वजह से घर आबाई शहर जाना टलते जा रहा है। सोचा था कि फर्स्ट ईयर के फाईनल के एग्जाम्स ख़त्म होते ही घर चला जाऊँगा, मगर ना। कोरोना ने इस से पहले ही घर जाने के तमाम रास्ते बंद कर दिए थे।

घर पर शब-ए-बरात, घर पर रमज़ान और तरावीह और अब घर पर ईद… वायरस हम सब को अपनी उंगलीयों पर नचा रहा है।

आज आपा ने बिरयानी बनाई थी। सबज़ीयों की बिरयानी क्यों कि घर से बाहर क़दम रखना और गोश्त खाना दोनों ही फ़िलहाल मना है। जो काम बी जे पी ना कर सकी, वो कोरोना ने कर दिखाया।

पता नहीं आपा वाक़ई अच्छा खाना बनाती हैं  या ग़लती से बिरयानी अच्छी बन गई थी। दिल चाह रहा था कि आपा के हाथ चूम लिए जाएं या दल खोल कर तारीफ़ तो कर ही लेनी चाहिए। लेकिन वो वैसे ही उकड़ू हैं। ख़्वामख़्वाह मज़ीद फैल जातीं। इस लिए ख़ामोश रहा।

लेकिन ना…

आपा ने पूछ पूछ कर नाक में दम कर दिया । “बिरयानी कैसी बनी है?”

मैं ने तारीफ़ कर दी। अच्छी तो वाक़ई थी।और फिर आपा ने ज़बरदस्ती मेरी बाल नोच नोच कर मुझ से तरकीब भी लिखाने की कोशिश की लेकिन मैं कॉलेज के असाइनमेंट का बहाना कर के जान बचा गया।

लेकिन आपा हट धर्म भी हैं। अपनी मर्ज़ी कर के रहीं। ये रही क्वारांटाइन बिरयानी की तरकीब।

 

 

क्वारांटाइन  बिरयानी के अजज़ा और तरकीब

अजज़ा:

  1. तीन प्याली चावल या फ़िर जितने आप को बनाने हों, लेकिन फिर बाक़ी अजज़ा का तनासुब भी बरक़रार रखिएगा। कुछ बिगड़ा तो ज़िम्मेदारी मेरी या आपा की नहीं।
  2. बहुत बड़ी सी एक अदद प्याज़। अगर बहुत बड़ी दस्तयाब ना हो तो मीडियम साइज़ की दो तीन प्याज़ भी ले सकते हैं। इस तरकीब में कोई क़ैद नहीं।जो मिल गया उसी को मुक़द्दर समझ लीजीए। जो ना मिला उस को भुलाते चले जाईए।
  3. दो दरमयाने साइज़ के टमाटर। कोशिश कीजीए कि नरम या गले हुए ना हों।
  4. एक अदद बड़ा सा आलू। छील कर उस के ख़ूबसूरत से चौकोर टुकड़े बुना लीजीए। मुझे आलू बहुत पसंद है। अच्छा हुआ कि आपा ने आलू डालने में कंजूसी नहीं की।
  5. एक अदद लीमूं। क्यों कि दही नहीं था। अगर हो तो वो डालिए, लेकिन लीमूं मत डालिएगा, वर्ना खटास से दाँत  चमक ना जाएं।
  6. पालक के कुछ पत्ते। डंडी निकाल लीजीए। ख़्वामख़्वाह बिरयानी में कचरा लगेगा।
  7. पीसा हुआ गर्म मसाला दो चमचा। खड़ा गर्म मसाला नहीं था।
  8. एक चुटकी जाइफ़ल जावित्री । ये भी हमारे घर मौजूद नहीं थी। आपा ने ख़ुद ही कहा कि ज़रूरी नहीं है। पता नहीं फिर तरकीब में लिखवाने की क्या ज़रूरत है?
  9. एक छोटा चमचा ज़ीरा। मुझे ज़ीरा नहीं पसंद। आप को भी नापसंद हो तो मत डालिए।
  10. दो खाने का चमचा कूटी हुई अद्रक।
  11. लहसुन की दो डलियां साफ़ छीली हुई। ये बहुत अहम है। ये काम मैं ने किया था और मेरा क़वी ख़्याल है कि बिरयानी का असल ज़ायक़ा दरअसल इन लहसुनों की वजह से आया।
  12. कुछ हरी मिर्चें। आपा ने उन्हें बड़ी सफ़ाई से लंबाई में काटा था। यूं भी टुकड़े कर के डालने से ज़ायक़ा में कोई फ़र्क़ आने की उम्मीद नहीं। मर्ज़ी है आप की।
  13. हरा धनिया ढेर सारा। मैं इस पर एतराज़ करना चाहता था। लेकिन आपा ने चुप करा दिया। “पहले ही पोदीना नहीं है। हरा धनिया भी ना डाला तो बिरयानी कैसी?”
  14. एक प्याली नमक के पानी में भीगे हुए सोयाबीनchunks۔ chunks की उर्दू ना मुझे आती है ना आपा को। अनाड़ी पकाने वालों की  यही पहचान है। आपा का मानना है कि सोयाबीन सब्ज़ी ख़ोरों का गोश्त है, ज़ायक़ा  में भी और  देखने में भी।अगर आप आँख बंद करके सोयाबीन चबाएं तो गोश्त का सा ज़ायक़ा और एहसास होगा।
  15. बहुत सारा तेल।
  16. और नमक हसब-ए-ज़ायक़ा।

तरकीब:

चावल के इलावा बाक़ी सारी चीज़ों को बर्तन में डाल कर  ख़ूब अच्छी तरह फेंट दीजीए। चाहिए तो कुछ वक़्त उसे ऐसे छोड़ दीजीए ताकि सारे अजज़ा आपस में घुल मिल जाएं। यकजिहती में बड़ी ताक़त है।

इस के बाद धुले चावल की परत लगाइये। पानी बड़े ध्यान से डालिए, इस तरह कि मसालिहा चावल के नीचे ही रहे, तड़प कर ऊपर ना आ जाये। चावल के ऊपर एक पूर डूबने  तक पानी डालिए।

थोड़ा तेल मज़ीद लुढका दीजीए। और चावलों का नमक भी कुछ अलग से डालना चाहें तो। आपा को नमकीन बिरयानी पसंद है, लेकिन मेरी पसंद का लिहाज़ करते हुए उन्हों ने  ऊपर से नमक नहीं डाला।

केवड़ा की चंद बूँदें टपका दीजीए। ना हूँ तो इन्कम टैक्स ऑफीसर बिन जाईए। आपा ने यही किया।केवड़ा की तीन शीशियां फ़र्ज में ख़ाली पड़ी थीं। इतने दिनों से सोच रहा था कि उन का मुसर्रिफ़ किया है। आज समझ आया। केवड़ा की कमी पूरी करने के लिए आपा ने इन शीशियों को अच्छी तरह धो कर इन्कम टैक्स ऑफीसर की मानिंद उन में से केवड़ा निचोड़ा था।

अब कूकर को गैस पर रख दीजीए।

चूल्हा जलाना मत भूलीएगा। अब कितनी देर पकाना है, ये आपा जानती होंगी। आप उन से पूछ लीजीएगा। या कुछ अपनी भी अक़ल इस्तिमाल कीजीए। क्या हर बात में ही बताऊं?

ख़ैर, अगर आप बिल्कुल ही अनाड़ी हैं तो सुनिए: पांच मिनट या जब तक कुकर की सीटी न आए, आंच फुल रखिए उस के बाद धीमी आंच पर पंद्रह मिनट पकाइए। बस, बिरयानी तैयार है। आपा ने साथ में मजेदार दाल भी पकाई थी लेकिन सलाद और रायता भी चलता है, आप की मर्ज़ी।

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