Drama Review Hindi | Habs | Episode 26

 

हब्स क़िस्त26 तहरीरी अपडेट और जायज़ा

हब्स की इस क़िस्त ने मुझे मुस्कुराने के काफ़ी मवाक़े फ़राहम किए और इस से पता चलता है कि ये क़िस्त कितनी अच्छी थी। मेरा मतलब है, ये बहुत उम्दा या परफ़ेक्ट नहीं थी, लेकिन तमाम रोना धोना और ग़लत-फ़हमियों और चीख़-ओ-पुकार के बाद, इस क़िस्त ने कुछ अच्छे लमहात दिए

चलें, जमा हो जाएं ये हब्स की26 क़िस्त का जायज़ा लेने का वक़्त है


बासित और आईशा ने आख़िर-ए-कार अपने मसाइल हल कर लिए

आख़िर-ए-कार

आख़िर-ए-कार!

आख़िर-ए-कार!!

मसला हल हो ही गया। मैं बयान नहीं कर सकती कि मैं कितनी बुरी तरह से उन दो अहमक़ों को अपनी ग़लतीयों से सीखते और अपने मसाइल को हल करते देखना चाहती थी। आईशा ने सुना कि बासित सोहा से क़ुदसिया के बारे में बात रहा है और हमेशा की तरह वो ग़ुस्सा में घर से बाहर निकल गई। ताहम, इस बार बासित उस का पीछा करता है और उसे रोकता है और उसे घर वापिस ले आता है

आईशा यूं बर्ताव करती है गोया कह रही हो, मैकू जाने का है।

बासित यूं बर्ताव करता है गोया कह रहा हो, ए तो बैठ की बात सन मेरी।

अगरचे बासित क़ुदसिया से नाराज़ है, लेकिन वो अपने मुआहिदे को बरक़रार रखता है और आईशा को इस के बारे में नहीं बताता है। अगरचे आईशा नहीं जानती कि क़ुदसिया ने किया-किया है, लेकिन वो पहली बार बासित पर यक़ीन करती है। ये बहुत ही नया था

इस से भी ज़्यादा फ़रीश ये था कि आईशा इस क़िस्त में मुस्कुरा रही थी। चाहे वो बालकोनी में हो, या रैस्टोरैंट में, या अपने कमरे में, बासित और आईशा गपशप करते हैं और बात करते हैं और मुस्कुराते हैं। बासित बहुत हस्सास और आईशा के साथ बहुत केअरिंग था। मेरा दिल चाहता है कि मैं कुछ कहूं।अगर फ़िरोज़ हक़ीक़ी ज़िंदगी में इस तरह होता तो हम हालिया बदसूरत क़ानूनी और सोशल मीडीया की लड़ाई का मुशाहिदा नहीं कर रहे होते। लेकिन , मुझे पूरी हक़ीक़त का इलम नहीं, और मैं यहां सिर्फ ड्रामा और फ़िरोज़ की अदाकारी का जायज़ा लेने आई हूँ, ख़ुद फ़िरोज़ का नहीं

आईशा सोहा के बारे में अब भी ग़ैर महफ़ूज़ है, और उसे होना भी चाहिए। लड़की (सोहा पीछे नहीं हटती। वो इस जोड़े को अकेला क्यों नहीं छोड़ सकती? मैं देखना चाहती हूँ कि सोहा कहानी में कितने तनाज़आत लाती है

~

तलाल वापिस आगया

जब से तलाल की शादी हुई है हमने उसे नहीं देखा। मैंने समझा था कि तलाल बाब ख़ैर के लिए बंद हो गया है, लेकिन ऐसा नहीं है

मैंने समझा था कि तो है तो दरख़शां है हयात।।

हम देखते हैं कि तलाल और इस की माँ, दोनों बीवी/बहू से ख़ुश नहीं हैं। वो काहिल और काम-चोर और ज़बान दराज़ है, ये हम सब समझते हैं। मैं जो समझने में नाकाम रही वो ये है कि मौजूदा प्लाट से इस की मुताबिक़त है। क्या हमें ये समझना है कि तलाल और इस की वालिदा को अपनी ग़लती का एहसास होगा और तलाल रेंगते हुए बानो के पास वापिस आजाएगा? ये अब तक की बदतरीन चीज़ होगी, क़ुदसिया के किरदार के बाद दूसरे नंबर पर

बानो, मेरी जान, अगर तुम तलाल के पास उस के बाद वापिस चलबावजूद उस के जो उसने तुम्हारे साथ किया, तो तुम्हारी और मेरी दोस्ती ख़त्म। तुम अब तक मेरे पसंदीदा रही हो, लेकिन बेवक़ूफ़ मत बनू और तलाल को अपनी तकलीफ़ का दुखड़ा रो कर अपना दिल ना जीतने ना दो

~

आमिर, हाय आमिर

बिल्क़ीस के ज़ोया के बारे में तहफ़्फुज़ात के बावजूद, आमिर ज़ोया को वापिस लाने जाता है। मुझे ये पसंद नहीं आया जैसे वो अपनी माँ से बदतमीज़ी करता है और घर से निकल जाता है।

ज़ोया के घर वाले अपने दामाद से बात करने के लिए इकट्ठे बैठते हैं।वो कहते हैं ना कि बात निकली तो बहुत दूर तिलक जाएगी। वैसा ही हुआ। बोबी इस बात की तारीफ़ करती है कि आमिर ने इतनी भारी रक़म 2 लाख रुपय ज़ोया को शॉपिंग के लिए दी है।

आहा।

तो, बिल्ली थैले से बाहर आ ही गई आमिर को जल्दी ही एहसास हो गया कि बिल्क़ीस के शकूक उस के सैफ से चोरी के बारे में ग़लत नहीं थे। ज़ोया तमाम इल्ज़ामात की तरदीद करती है, लेकिन आमिर इतना बेवक़ूफ़ नहीं है, इसलिए वो वहां से चला जाता है।

“मैं तुम्में अपने घर नहीं ले जा रहा,” आमिर ज़ोया से कहता है।

अब, वो परेशान है और इस से बिल्क़ीस भी परेशान है। सच्चाई को जानने के बाद, वो दुबारा ज़ालिम सास बन गई है। और, आमिर बड़ा सवाल पूछता है

“कया करो? छोर दोन?” आमिर ने अपनी माँ से पूछा।

अरे मेरे भाई? ये वही लड़की है जो आपके साथ भागी थी। तुम उसे इतनी आसानी से छोड़ने की बात कैसे कर सकते हो? क्या शादी की इतनी कम क़ीमत है? मैं इस बात से इत्तिफ़ाक़ करती हूँ, ज़ोया बेहतरीन बीवी या एक काबिल गुज़र बहू भी नहीं है, लेकिन तलाक़ बहुत ज़्यादा है। यही जज़बात हक़ीक़ी ज़िंदगी में भी लोगों के लिए लागू होते हैं। तमाम गुनाह और बुराईयां मुआशरे में इस क़दर मामूल बन चुकी हैं कि लोग इसे लेकर बहुत बे-तकल्लुफ़ी से बात करते हैं। ये तकलीफ़-दह है, ये वाक़ई बहुत तकलीफ़-दह है।

क़ुदसिया हक़ीक़त

तो आमिर ज़ोया को लेकर बाहर चला गया। इस से क़ुदसिया को एक और मौक़ा मिलता है कि वो अपने सबसे छोटे बच्चे पर लानत भेजे। इस बार ज़ोया ने जवाब दिया। वो अपनी माँ को बताती है कि वो कितनी ख़ौफ़नाक थी, और उसने अपनी बेटीयों में कौन सी ख़राब ख़सुसीआत डाली हैं, और ये कि वो उनकी तरह तरह की बर्बादी की वजह है। मैं मानता हूँ कि क़ुदसिया को इस की ज़रूरत थी, लेकिन ज़ोया को कोई हक़ नहीं है कि वो किसी और पर इल्ज़ाम लगाए। आप अपनी गंदगी के ज़िम्मेदार हैं, इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है कि बैरूनी हालात ने आपकी ज़िंदगी को किस तरह मुतास्सिर किया है।

मैं हैरान हूँ कि क्या क़ुदसिया को अपनी ग़लतीयों का एहसास होगा , या इस तरह जारी रहेगा कि वो कहे मैं सब तुम लोगो की भलाई के लिए किया है।

इस के इलावा, मैं देखनी चाहती हूँ कि आमिर ज़ोया के बारे में क्या फ़ैसला करता है। इस के लिए हम अगली क़िस्त का इंतिज़ार करेंगे।

ठीक है, फिर मिलते हैं।।

~

Until next review, please check out my books on Amazon.

Shabana Mukhtar

 

।।

~

~

Until next review, please check out my books on Amazon.

Shabana Mukhtar