Book Promotion | मिलना था इत्तिफ़ाक़, बिछड़ना नसीब था: चार कहानियाँ

मिलना था इत्तिफ़ाक़, बिछड़ना नसीब था: चार कहानियाँ (Hindi Edition)

Description:

Presenting four stories by Shabana Mukhtar together in one book.

बिछड़ना नसीब था

फौज़िया एक गाइनॉकॉलजिस्ट थी। अस्पताल की जॉब और प्राइवेट प्रैक्टिस में मगन, अपना आप भूले हुए थी।
हैदर एक जनरल फ़ज़ीशन था। एक अच्छे शरीक-ए-सफ़र की तिश्ना ख़ाहिशात के साथ जी रहा था।
तेईस साल की उम्र में सवेरा ने एमटेक में एडमीशन लिया था। टीन एज में ही बाप का इंतिक़ाल हुआ, फिर बीस साल की उम्र में माँ को भी खो दिया। उसे लगता था कि उसने दुनिया देख ली है। और एक नई जगह पर नई ज़िंदगी गुज़ारने के लिए बिलकुल तैयार है। फ़ौरन फ़ैसला लेने की सलाहीयत और ख़ुदमुख़तारी से भरपूर, उसे कौन सी चीज़ उसे अपने ख़ाबों को पाया-ए-तकमील तक पहुंचाने से रोक सकती थी? वो जानती ना थी कि अपने बदतरीन दुश्मन को वो अपने ख़ाक-ए-लहद फिर रही है।
कैरीयर के लिए बाक़ी सब नज़रअंदाज कर देने वाली औरत की कहानी।।।
औरतों पर अपनी मुकम्मल इजारादारी चाहने वाले मर्द की कहानी।।।
ख़ुद को एकल-ए-कल समझने वाली एक कमअक़्ल लड़की की नादानियों की कहानी।

उफ़ यह लड़की

हानिया एक बिंदास लड़की है| हमेशा घर वालो की लाडली| जो मुँह में आए बोल देने की आदत थी| कोई फ़िक्र न थी| लेकिन फिर लोगों ने उस की फीलिंग्स को समझना ही छोड़ दिया|
छोटी छोटी बातों से होने वाले बड़े बड़े प्रॉब्लम्स की कहानी.

फेरवेल गिफ्ट
मयांक, अमीत और अंजलि तीन माह क़बल ही एक दूसरे से मिले थे,जब वह शेफ़ील्ड शॉर्ट टर्म असाइनमनट पर आए थे। बहुत कम वक़्त में उनकी दोस्ती बहुत गहिरी हो गई थी।
एक छोटी सी कहानी उस दिन की जब उनमें से एक का शेफ़ील्ड में आख़िरी दिन था। दोस्ताना छेड़छाड़ थोड़ी ज़्यादा ही आगे बढ़ गई तो क्या हुआ?

कुछ लोगों को मज़ाक़ करने और यूँही चिढ़ाने की आदत होती है। इस के लिए वह मुसलसल किसी टार्गेट की तलाश में रहते हैं। ख़वास इस से दो दूसरों की दिल-आज़ारी ही क्यों ना हो। ये दोस्ताना छेड़-छाड़ अगर बढ़ जाये तो नाक़ाबिल-ए-तलाफ़ी नुक़्सान भी हो सकता है। रिश्ता टूट भी सकते हैं।

मिलना था इत्तिफ़ाक़
अस्मारा ख़ान शहर इंदौर , मध्य प्रदेश की रहने वाली थी। मुम्बई की एक एड एजेंसी में कैमपेन मैनेजर के तौर पर काम कर रही थी। एक असाइनमेंट के लिए कोलकाता में थी।
बहुत दिनों बाद उस की छुट्टी की दरख़ास्त मंज़ूर हो गई। अपनी फ़ैमिली, और दोस्तों के साथ छुट्टीयों को ज़बरदस्त तरीक़े से गुज़ारने के लिए बहुत सारे प्लान बनाए थे। वो नहीं जानती थी कि क़िस्मत उस के लिए कुछ और ही प्लान किए हुए है।
सफ़र की लम्हा बह लम्हा एक मुख़्तसर कहानी, अस्मारा की ज़बानी।

बिछड़ना नसीब था
Price: Rs. 200

उफ़ यह लड़की
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फेरवेल गिफ्ट
Price: Rs. 50

मिलना था इत्तिफ़ाक़
Price: Rs. 100

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